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ASTROLOGY

Posted on October 23, 2014 at 12:35 AM Comments comments (15)

                                                                                                  दीपावली पर सूर्य ग्रहण का साया

           23 October,2014 कातिक मास कि अमावस्या पर पूरे भारतवर्ष में दीपावली का त्योहार मनाया जायेगा| इस रात्रि को महानिशा वाली रात भी कहा जाता है| इस दिन सूर्य ग्रहण भी लग रहा है| अमावस्या के दिन जो सूर्य ग्रहण लग रहा है वह् आशिक सूर्य ग्रहण है जिसका समय है मध्य रात्रि एक बजकर सात मिनट से लेकर चार बजकर इक्कीस मिनट तक का है|लेकिन इसका प्रभाव भारतवर्ष में नही पड़ेगा क्योकि भारत में रात को सूर्य नही दिखाई पड़ता है इसलिये सूर्य ग्रहण भारत में दश्य नही है| दिखाई नही पड़ता है इसलिए इससे हानि होनेवाले दुष्प्रभाव भी नहीं होगे| जो मान्यताये ग्रहण काल के दौरान होती है कि बासी भोजन नही करना चाहिए, गर्भवती महिलाओं को बाहर नही निकालना चाहिए आदि ये सभी वर्णनाये या नियम इस समय असर नही डालेगे|

         सूर्य इस समय शनि के साथ होगे, दूसरा सूर्य पर ग्रहण लग रहा है इसलिए यह सामान्य ग्रहण भी नहीं है| कहते है कि ग्रहण काल में ईश्वर आपकी मुश्किलों को ,बाधाओं को हर लेता है, इसलिए इस समय पूजा, उपासना की जाय तो वह् विशेष फलदायी होती है| विभिन राशियों पर विभिन असर पड़ता है और उसके निवारण के भी अचूक उपाय है| इनको करने से, अपनाने से ईश्वर आपकी तमाम समस्याओं को दूर् कर देता है|

         नहा धोकर पूजा स्थान में विशेष प्रकार के मंत्रों का जाप किया जाए और दीपावली के दूसरे दिन नहा धोकर उस गृह से संबंधित चीजू का दान करने से आने वाली संकटों का सामना कर सकते है|

        ग्रहण के पश्चात दान का अत्यधिक महत्व है| वस्त्रों का , अनाज का, फलो का, धन का, तिल का तथा गुड़ का दान करने की परम्परा है| बिना दान के आपकी पूजा निष्फल हो जाती है| दान करने से ईश्वर आपको अपार धन, बुद्धि एवं सुखी समृद्धशाली जीवन का वरदान देते है|

       सूर्य ग्रहण के दौरान अगर आप किसी मंत्र को अभिमंत्रित या सिद्ध करना चहिते है तो भी विशेष पूजा से, जाप से उसे सिद्ध कर सकते है और जब यह मंत्र सिद्ध हो जाते है तब जब भी आपको मुश्किलें या बाधाये आती हो, उस समय यह अभिमंत्रित मंत्र किसी वरदान से कम नहीं होते| इनको जपने से आपकी समस्याओं का हाल निकाल आता है और आपकी मनोकामनाये पूरी हो जाती है| नो खाने वाला कोई भी नंबर वाला यंत्र भी आप सिद्ध कर सकते है अगर उससे संबधित मंत्रों का जाप किया जाए| स्फटिक कि माला इसमे विशेष उपयोगी है| इससे आपके जीवन में धन एक बार आ जयेगा तो फिर जायेगा नही |

 

आचार्य अजय मोहन लाल

 

What is Saadhe Saati ?

Posted on December 30, 2012 at 3:45 AM Comments comments (0)

SAADHE SAATI

 It is seen among astrologer that Saturn's transit is considered bad except in 3,6 & 11 houses from Moon. The concept of Saadhe Saati is invariably taken as evil influence for all lagnas and rashis.

 

WHAT IS SAADHE SAATI?

When Saturn transit, 12th, 1st& 2nd house from one's natal Moon, it is called Saadhe Saati. As Saturn takes 2.1/2 years  in one's house, it takes 7.1/2 years in total in these 3houses. The effect of Saadhe Saati and Dhaiya on individual is good or bad depends on the placement of other planets in the birth chart. In my experience, I have  found that Shri H. N.Katwe, a very original astrologer of Maharastra had a theory, which gives more accurate results compared to the results of standard “ Saadhe Saati” based on entry of Saturn in transit into the sign before the natal Moon sign and its exit for the sign next to natal Moon. According to Shri H. N. Katwe (a Maharastrian Astrologer) to  calculate the Saadhe Saati, first note the natal Moon's degree, then substract 45 degreesfrom Moon's degree and then add 45 degrees to the natal Moon's degree, so thisOrb will be beginning and ending points of the Saadhe Saati in one's horoscope i.e. Saadhe Saati begins when Saturn is 45 degrees behind Moon and ends when it crosses 45 degrees beyond Moon.

 We should also judge the houses in which the Saadhe Saati is taking place. Planets and naksahatras which theSaadhe Saati influences should also be considered. Dending upon that good and bad results can be analysed.

Dhaiyyas is a period of 2.1/2 years which Saturn takes to transit through a sign. When Saturn transits through asign 4th from the the natal Moon, it is called “ Ardha – Ashtam”andwhen it transits through the sign 8th from the natal Moon, it iscalled “ Ashtam Shani”


OBSERVATIONS:-

  • Signification of Lordship of Moon, Saturn and houses (where the Saadhe Saati is taking place)activates during Saadhe Saati.
  • When the transitof other planets (preferably of major planets) are favourable along with dasha,“Saadhe Saati” cannot be adverse inspite of weak transit of saturn.
  • Ill effects ofSaadhe Saati are controlled if strong jupiter and Maha dasha lord in transitprotect the Moon by aspect or conjunction.
  • Ill effects arealso minimized if the Saturn is transiting over its exaltation sign, own signor friend's house.