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This blog contains the essence of a vastcross section of the writing of rishis, sants, the past and the present greats and big wigs of astrology. It will have separate fronts i.e. Finance, Health, Marriage, Children,Profession-Career, Miscellanary, Vastu Shastra, Naturalpathy, information on major festivals of India and other important information for the convenience of the users.

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MAHASHIRATRI

Posted on February 19, 2015 at 3:05 AM Comments comments (3065)

MAHA SHIVRATRI

The festival of Maha Shivratri is celebrated with great religious fervour all over India. This festival has a great importance in the lives of Hindus, especially Shiva followers who await this spiritual night every year. On the 14th New Moon of Maagha (Hindu month of Jan. & Feb.) and Phalgun ( Hindu month of Feb. & March.) as per the Hindu Calender on the Chaturdashi of Krishnapaksha. Mahashivratri falls on the 14th day of every lunar month, the day before the Amavasya or new Moon is referred to as Shivratri of the twelve shivratris, that occur in the calender year, the one that occurs in the lunar month is called Mahashivratri because it is most powerful.

Puranas associate the origin of this day with different events, some associate Mahashivratri as a night when lord Shiva did Tandava, other associate it as the when he drank the poisonous drink "HALAHAL" and came to be known as "NEELKANTH". There are others who believe it as the night when he got married to Goddess Parvati while some believe it as a birth day of Lord Shiva when he came in the form of lingam.

The main rituals involve purification, virtue and enlightenment.

It starts with bathng the lingam with milk, curd, honey, ghee and water. Later, the leaves of Bel fruits, betel leaves, flowers and fruit like dhaturas and baer are placed around lingam.

Sandalwood paste is applied on the lingam.

Incense sticks and/or dhoop are burt along with ghee lamp.

 Hymns and mantras are recited which are concluded with Shiva arti.

FOOD AND FASTING:-

Thesignificance of this festival is beneficial to married and unmarried women and all those who want to fulfill their desires. Many devotees keep fast on this day till 6 A.M. till next day and start their day with the worship of Lord Shiva.

The other thing which is important is the procedure of fasting where you can have saatvik food lke sabudana,phalahaar, bhang, thandai, for dinner. Wearing a rudraksha mala is considered to be very auspicious as rudraksha beads are supposed to have been originated from the tears of Lord Shiva.

There is constant recitation of " OM NAMAH SHIVYA" and "MAHAMRITYUNJAY" Jap

RELEVANCE OF MAHASHIVRATRI:-

Keeping fast and worshipping the lingam after taking bath grants the blessing of Lord Shiva and the person is said to achieve "MOKSHA". The worshpping of Lord Shiva helps in attaining liberation from all past sins and awakens spiritually. It helps in stengthening the body, mind and soul & guiding us towards enlightenment and happiness. This day marks the union of SHIVA and SHAKTI, the Godess of Energy.

Acharya Ajay Mohan Lal. 




BHAIYA DOOJ

Posted on October 25, 2014 at 5:15 AM Comments comments (54)

                                                                                                                       भैया दौज

                    दीपावली पर्वो की कड़ी में भैया दूज पंच दिवसीय पर्व है| कातिक शुकल पक्ष की द्दितीया को यह पर्व मनाया जाता है, इसलिए इसे भैया दूज कहते है| इसका सम्बन्ध भाई -बहन के पवित्र प्रेम के आदान प्रदान से है| इस दिन भाई बहन के घर जाता है| कहते है कि जो भाई बहन के घर जाकर भोजन करता है उसकी अकाल मृत्यु नहीं होती इसलिए इसे यम द्दितीया भी कहते है| इसके पीछे हिंदू परम्परा में कथा है कि सूर्य कि संतानें यम और यमुना वर्षो बाद आज के दिन ही मिलें| यमुना ने यम का भर पूर स्वागत किया और प्रसन्न हो कर यम ने वरदान दिया कि आज के दिन जो बहन अपने भाई का सत्कार करेगी, तिलक लगायेगी, वह् सदा आनंद प्राप्त करेगी | इस दिन भगवान चित्र गुप्त की पूजा होती है क्यो कि चित्र गुप्त व्यकित के कर्मो का हिसाब रखते है| चित्र गुप्त का जन्म ब्र्रह्मा जी के चित्त से हुआ था | मुख्य रुप से इनकी पूजा भी भाई दूज के दिन होती है| इनकी पूजा करने से व्यकित को लेखनी, वाणी और विद्या का अदभुत वरदान मिलता है| सुबह नहा धोकर पूर्व दिशा की और मुख करके बैठ जाए ,चौक बनाये या लकडी की चौकी पर पीला कपड़ा बिछा ले उसपर चित्र गुप्त की मूर्ति या फोटो लगा ले| सामने देशी घी का दीपक जलाये| सफेद कागज पर हल्दी मिलें पानी में उंगली डुबोकर पहेले ॐ गणेशाय नम लिखे फिर 11 बार ॐ चित्र गुप्ताय नम: लिखकर उसे चित्र गुप्त भगवान को अर्पित कर दे, जिस कलम से लिखा है उसे अपने पास सुरक्षित रख ले भले refill बदल सकते है| पर कलम वही अपने पास रखे|इस दिन यमराज की भी पूजा करतें है | शाम को घर के मुख्य दरवाजे के पास बायी तरफ़ मिट्टी के कलश में पानी भरकर रखे|फिर उस पर सरसों के तेल का चौमुखी दीपक रख कर जलाये| सुबह को उस जाल से पूरे घर में छिड़काव करे| इससे स्वास्थ्य उत्तम रहेगा और बीमारी से मुकित मिलेगी|

                  मनचाहे जीवन साथी पाने के लिए इस दिन अगर शिव- गोरी की उपासना की जाय तो वह् शीघ्र लाभकारी होती है| इस दिन शिव गोरी के साथ कैलाश पर्वत पर विराजमान रहते है| इनकी संयुक्त रुप से पूजा करे तथा सफेद व लाल फूलों की एक माला दोनों को एक साथ पहनाये और शीघ्र विवाह के लिए प्रार्थना करे|

                 जैन परंपरा के अनुसार महावीर निर्वाण के बाद उनके बडे भाई राजा नंदिवर्धन दाह संस्कार के बाद भी वहां बैठै विलाप कर रहे थे| परिजनों से उनका यह हाल देखा न गया | अंत: उनकी बहन सुर्दशाना ने आकर उन्हें शौक मुक्त किया }

 

आचार्य अजय मोहन लाल

ASTROLOGY

Posted on October 23, 2014 at 12:35 AM Comments comments (20)

                                                                                                  दीपावली पर सूर्य ग्रहण का साया

           23 October,2014 कातिक मास कि अमावस्या पर पूरे भारतवर्ष में दीपावली का त्योहार मनाया जायेगा| इस रात्रि को महानिशा वाली रात भी कहा जाता है| इस दिन सूर्य ग्रहण भी लग रहा है| अमावस्या के दिन जो सूर्य ग्रहण लग रहा है वह् आशिक सूर्य ग्रहण है जिसका समय है मध्य रात्रि एक बजकर सात मिनट से लेकर चार बजकर इक्कीस मिनट तक का है|लेकिन इसका प्रभाव भारतवर्ष में नही पड़ेगा क्योकि भारत में रात को सूर्य नही दिखाई पड़ता है इसलिये सूर्य ग्रहण भारत में दश्य नही है| दिखाई नही पड़ता है इसलिए इससे हानि होनेवाले दुष्प्रभाव भी नहीं होगे| जो मान्यताये ग्रहण काल के दौरान होती है कि बासी भोजन नही करना चाहिए, गर्भवती महिलाओं को बाहर नही निकालना चाहिए आदि ये सभी वर्णनाये या नियम इस समय असर नही डालेगे|

         सूर्य इस समय शनि के साथ होगे, दूसरा सूर्य पर ग्रहण लग रहा है इसलिए यह सामान्य ग्रहण भी नहीं है| कहते है कि ग्रहण काल में ईश्वर आपकी मुश्किलों को ,बाधाओं को हर लेता है, इसलिए इस समय पूजा, उपासना की जाय तो वह् विशेष फलदायी होती है| विभिन राशियों पर विभिन असर पड़ता है और उसके निवारण के भी अचूक उपाय है| इनको करने से, अपनाने से ईश्वर आपकी तमाम समस्याओं को दूर् कर देता है|

         नहा धोकर पूजा स्थान में विशेष प्रकार के मंत्रों का जाप किया जाए और दीपावली के दूसरे दिन नहा धोकर उस गृह से संबंधित चीजू का दान करने से आने वाली संकटों का सामना कर सकते है|

        ग्रहण के पश्चात दान का अत्यधिक महत्व है| वस्त्रों का , अनाज का, फलो का, धन का, तिल का तथा गुड़ का दान करने की परम्परा है| बिना दान के आपकी पूजा निष्फल हो जाती है| दान करने से ईश्वर आपको अपार धन, बुद्धि एवं सुखी समृद्धशाली जीवन का वरदान देते है|

       सूर्य ग्रहण के दौरान अगर आप किसी मंत्र को अभिमंत्रित या सिद्ध करना चहिते है तो भी विशेष पूजा से, जाप से उसे सिद्ध कर सकते है और जब यह मंत्र सिद्ध हो जाते है तब जब भी आपको मुश्किलें या बाधाये आती हो, उस समय यह अभिमंत्रित मंत्र किसी वरदान से कम नहीं होते| इनको जपने से आपकी समस्याओं का हाल निकाल आता है और आपकी मनोकामनाये पूरी हो जाती है| नो खाने वाला कोई भी नंबर वाला यंत्र भी आप सिद्ध कर सकते है अगर उससे संबधित मंत्रों का जाप किया जाए| स्फटिक कि माला इसमे विशेष उपयोगी है| इससे आपके जीवन में धन एक बार आ जयेगा तो फिर जायेगा नही |

 

आचार्य अजय मोहन लाल

 

NAAG PANCHAMI PAR POOJA

Posted on July 31, 2014 at 5:05 PM Comments comments (15)

नाग पंचमी पर पूजा

नाग पंचमी श्रवण मास में शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जयेगा| यह श्रद्धा विश्वास का पर्व है| नगों को धारण करने वाले भगवान भोलेनाथ की पूजा आराधना करना भी इस दिन विशेष रुप से शुभ माना जाता है|

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पंचमी तिथि के स्वामी नाग देवता है| श्रवण मास में नाग पंचमी होने के कारण इस मास में धरती खोदने का कार्य नहीं किया जाता| भूमि में हाल चलाना, नीव खोदना शुभ नहीं माना जाता है| भूमि में नाग देवता का घर होता है, भूमि खोदने से नगों को कष्ट होने की सम्भावना होती है तथा नाग अपने बिलों से बाहर आकर काट भी सकते है|

नाग देवता कि पूजा उपासना के दिन नगों को दूध पिलाने का कार्य नहीं करना चाहिए| शिव लिंग को दूध से स्नान करा सकते है|दूध पिलाने से नगों की मृत्यु का कारण हो सकती है| ऎसे में नगों को दूध पिलाना, अपने हाथों से अपने देवता की जान लेने के बराबर होता है| इसलिए भूलकर ऐसी गलती करने से बचना चाहिए| नगों की स्वंतत्र पूजा नहीं करनी चाहिये| सिर्फ़ नगों की पूजा करने का मतलब है कि NAGATIVE की पूजा करना है| शिव के गले में नाग शुभ है तथा शिव के साथ ही पूजा करनी चाहिए|

सुबेरे उठ कर शिवाजी का स्मरण करे| उनका अभिषेक करे, उनको जल तथा बेलपत्र चदाये | नगों को हलदी, रौली, चावल और फूल चदाये | इसके बाद चने, खील बदाशे और कच्चा दूध अर्पित करे| घर के मुख्य द्वार पर दोनों और गोबर या गेरु या मिठ्ठी से सर्प की आकृति बनाए तथा मंत्र " ओम कुरु कुल्ले फट" कहते हुए जल को पूरे घर में छिडाक दे|

अगर आप को सपने में साँप आते है या सर्प से भय लगता हो तो नगों कि विशेष पूजा तथा प्रार्थना करनी चाहिए| अगर आप राहु या केतु से परेशान हो रहे है तो आप नाग पंचमी पर उपाय कर सकते है| इस दिन आप एक बड़ी तथा मोठी रस्सी ले आए तथा उसमे सात गाठे लगा ले तथा इसको यह मानिये कि यह सात गाठे वाला एक सर्प है| इसको एक आसन पर रख दे |

आप इसको कच्चा दूध, बताशे, फूल अर्पित करे| गुग्गल कि धूप जलाये | इसके बाद राहु का मंत्र का जाप करे| राहु का मंत्र " ओम राँ रहुवे नम:" का जाप करे| इसके बाद केतु का मंत्र " ओम केँ केतुवे नम:" का पाठ करे | ,मंत्र पढ़ने के बाद रस्सी के सातों गाँठों को खोल दे तथा रस्सी को बहते हुए जल में बहा दे | आप कि राहु या केतु से जितनी भी समस्याये है सब की सब शान्ति हो जायेगी |

2.आप चाँदी का नाग तथा नागिन लेआये तथा एक स्वस्तिक ले आए| नाग और नागिन को एक थाल में तथा स्वस्तिक को एक थाल में रखे तथा पूजा करे| नाग नागिन को कच्चा दूध तथा स्वस्तिक पर बेलपत्र अर्पित करे| "ओम नागेंद्र्हाराय नम:" का जाप करते रहे|नाग नागिन को शिवलिंग पर अर्पित कर दे तथा स्वस्तिक को लाल धागे में डाल कर पहन ले|

3. शिव के मंदिर जाएँ जिसके शिवलिंग के ऊपर सर्प का छत लगी हो | शिवलिंग पर पंचामृत ऐसे अर्पित करे कि वो सर्प पर से होता हुआ शिवलिंग पर आए फिर गंगा जल चढाये | " ओम नमो नील कंठाय " का जाप करते रहे|

इन सभी उपाय से दुष्ट योगों का प्रभाव कम हो जाता है |

आचार्य अजय मोहन लाल

 

 

 

 

TWINS CHILDREN

Posted on June 26, 2014 at 1:20 PM Comments comments (14)

 

                                                                                              जुडवा बच्चे - ज्योतिषी विश्लेष्ण

 

जुडवा बच्चे कब पैदा होते है और जुडवा बच्चे पैदा होने पर माँ-बाप पर क्या असर होता है, इसे ज्योतिष नजरिये से जानने की कोशिश करते है|

जब माता-पिता कि कुण्डली में संतान भाव यानि पंचम भाव का स्वामी द्विस्वाभाव की राशि में हो तो जुडवा बच्चे होने की सम्भावना ज्यादा हो जाती है या आप का लग्न मिथुन, कन्या या मीन हो और बुध, चंद्रमा, संतान कारक हो या आपका मूलांक 1,10,19,28,6,9, हो तो भी जुडवा बच्चे होने की सम्भावना अधिक रहती है|

अब जुडवा बच्चे पैदा होने पर एक बात तो बिलकुल साफ़ है कि दोनों बच्चो के भाग्य की स्थित एक दम अलग है| दोनों बच्चों का कुंडली तो एक दम एक है परन्तु दोनों बच्चो का भाग्य बिलकुल अलग होता है| इसका असर माता- पिता पर बहुत पढता है क्यो कि आपके घर दो-दो जीवन आए और दोनों का भाग्य का असर आपके जीवन पर पढ़ेगा| ऐसा देखा गया कि जुडवा बच्चो के होने से आप का भाग्य में बहुत तेजी से उतार- चढ़ाव आता है| जिन माता-पिता कि आर्थिक स्थित अच्छी नही थी परन्तु जुडवा बच्चों के होने के बाद उनकी आर्थिक स्थित में बहुत तेजी से सुधार आता है| क्योँकि दोनों बच्चो के भाग्य ने बहुत तेजी आप के भाग्य में परिवर्तन किया होगा | परन्तु ऐसा भी देखा गया कि जिन माँ-बाप कि आर्थिक स्थित पहले से अच्छी होती है परतु जुडवा बच्चो पैदा होने के बाद आर्थिक स्थित खराब हो गई है| शोध करने पर यह पाया गया कि अधिकतर जिन माँ-बाप कि आर्थिक स्थित पहले से खराब थी, जुडवा बच्चो के पैदा होने के बाद, अच्छी हो गई|

 

 

अगर जुडवा बच्चे आप के घर में पैदा हो जाएँ तो यह आप की जिम्मेदारी बन जाती है कि उनका जीवन अच्छा चले क्योकि जुडवा बच्चे आप कि ही संतान है| ऐसा देखने में आया कि जुडवा बच्चो में एक का जीवन बहुत अच्छा होता है और एक बच्चे के जीवन में बहुत संर्घष होता है| जुडवा बच्चो का जीवन अच्छा चलता रहे, इसके लिए आप को कुछ उपाय करने चहियें:- 

1. दोनों बच्चो का भाग्य एक सा नहीं होता है| एक बच्चा बहुत भाग्यशाली होता है और एक बच्चे को बहुत अधिक संर्घष करना पढ़ता है|इसलिए जुडवा बच्चो का संयुक्त रुद्रभिषेक करना चाहिये क्योकि जो जुडवा बच्चो कि गडबडियां है, वह् दूर् हो जाए|

2. बडे बच्चे के स्वास्थ पर विशेष ध्यान देना चाहिये| ऐसा देखने में आया कि बडे बच्चे का स्वास्थ अच्छा नहीं होता है|

3. जिस बच्चे के जीवन में अधिक संर्घष हो, उसे मोती पहनना चाहिये|

4. जुडवा बच्चो का नाम भी तालमेल वाला (Rhym) या एक ही अक्षर वाला नहीं होना चाहिये- जैसे कि राम-श्याम, अजय-अमित|

5. जुडवा बच्चो का विवाह एक ही समय पर नहीं करना चाहिये, कम से कम एक साल का अन्तर जरूर होना चाहिये|

 

इन उपाय करने से आप अपने बच्चो के जीवन से संर्घष को कम कर सकते है|

 

 

Acharya Ajay Mohan Lal


Som Vati Amavatsa

Posted on December 1, 2013 at 11:05 AM Comments comments (429)

सोमवती अमावस्या

सोमवार के दिन पडने वाली अमावस्या 'सोमवती अमावस्या' कहलाती है| ऐसा संयोग कम ही होता है जब अमावस्या सोमवार के दिन हो | सोमवाटी अमावस्या तो पूर्णरूपेण शिवजी को समर्पित होती है|

कैसे करे पूजन :-

नदी या सरोवर के जल में स्नान कर सूर्य को गायत्री मंत्र उच्चारण करते हुए अर्ध्य देना चाहिए लेकिन जो लोग घर पर स्नान करके अनुष्ठान करना चाहते है उन्हें पानी में थोडा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए|सोमवती अमावस्या या मौनी अमावस्या के दिन 108 बार तुलसी परिक्रमा करे| सोमवती अमावस्या के दिन सूर्य नारायण को जल देने से गरीबी और दरिद्रता दूर् होती है|

इस दिन मौन व्रत रहने से सहस्त्र गोदान का फल मिलता है| इसे अस्वत्थ प्रदक्षिणा व्रत की भी संज्ञा दी गयी है|अस्वत्थ यानि पीपल वृक्ष | इस दिन विवाहित स्त्रियों द्वारा पीपल के वृक्ष की दूध जल पुष्प अक्षत चंदन इत्यादि से पूजा और वृक्ष के चारों और 108 बार धागा लपेट कर परिक्रमा करने का विधान है|

कहा जाता है कि महाभारत में युधिष्ठिर ने भीष्म को इस दिन का महत्व समझाते हुए कहा था कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने वाला मनुष्य समृद्ध, स्वस्थ्य और सभी दुखों से मुक्त होगा| ऐसा भी माना जाता है कि स्नान करने से पितरों कि आत्माओ को शांति मिलती है|

आचार्य अजय मोहन लाल

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Posted on August 2, 2013 at 5:55 AM Comments comments (3)

शयन में देव धार्मिक एवं मांगलिक कार्य क्यों नहीं ?

ब्रह्मा जी ने प्रकृति की स्थापना एवं आवश्यक जीवन के लिए छ्ह ऋतुओ की स्थापना की जिन्हें ग्रीष्म, वर्षा, शीत,हेमंत,शिशिर,बसंत आदि नामों से पुकारा गया| इसी आधार को लेकर छ्ह माह देव शयन और छह माह देव जागरन को रखा गया,जिसे ज्योतिष विज्ञान उत्तरायण एवं दक्षिणायन कहता है |उत्तरायन में देवताओं का जागरण होता हे|इस समय जो भी कार्य किया जाते हे वह् देवताओं को प्राप्त होते है और कार्य पूर्ण शुभ भी रहते है|दक्षिणायन में राक्षसों का अधिकार होता हे| इस समय जो भी कार्य किया जाते है, उनमे कोई ना कोई बँधा अवश्य आती है और कार्य भी परिपूर्ण नहीं होते, इस समय दी गई आहूति भी राक्षसों को प्राप्त होती हे|

शास्त्रों के आधार पर हमारे मुख्य तीन देवता हे- ब्रह्मा,विष्णु एवं महेश | एक उत्पत्ति करते है, दूसरे पालन और तीसरे उसका अंत और इन तीनों के भी शयन का समय भारतीय शास्त्रों में निर्धारित है| प्रत्येक शयन के लिए चार- चार माह दिए गए हे |सबसे पहले ब्रह्मा जी का शयन होता हे जो पौष मास में प्रारंभ होता है इस समय विष्णु और शिव जागकर पृथ्वी का पालन और रक्षा का दायित्व निभाते है| इसके बाद आषाढ शुक्ल एकादशी अर्थात देव शयन एकादशी से देव उठान एकादशी तक विष्णु का शयन होता है, इसलिए सारे धार्मिक और मागलिक कार्य अस्त रहते है,क्योंकि भगवान विष्णु पृथ्वी के पालनहार और भोक्ता हे| इसलिए उनके शयन के समय कोई रचना नहीं की जां सकती | इस समय शिव जागरण होता है और शिव जागते रहते है|इसलिए मंदिरो में इस समय शिव पूजा का अधिक विधान रहता है| श्रावन मास में शंकर को मानकर अधिक पूजा जाता है|इसके बाद शिव शयन होता है जो भाद्रपद मास की अमावस्या से शिवरात्रि तक चलता है, जिसमे मदिरौ में शिव जी के ऊपर टपकने वाला बर्तन (जलहरी) हटा दिया जाता है| शिवरात्रि के दिन पुन: शिवलिंग के ऊपर जाल वाला बर्तन लगा दिया जाता है| इस प्रकार यह क्रम चलता रहता हे| इसका अर्थ यह हे कि विष्णु शयन के कार्यकाल में धार्मिक और मांगलिक कार्य नही होनी चाहिए क्यूँकि न विष्णु पृथ्वी पर होते है ना ही उत्तरायण एवं ना ही उत्तरगोल| जब सब चीजीं का लोप हो जाता हे तो फिर हमारे भविष्य निर्माण के महत्वपूर्ण पलों को क्यों हम देवशयन में करे|

आचार्य अजय मोहन लाल

BHAJAN

Posted on May 30, 2013 at 6:00 AM Comments comments (161)

भजन

भगवान मोरी नेयया उस पर लगा देना,

अब तक तो निभाया है, आगे भी निभा देना|

दलबल के साथ माया घेरे जो मुझको आकर,

तो देखते न रहना,झट आके बचा लेना|

भगवान.........

संभव है झंझटों में में तुमको भूल जाऊँ,

पर नाथ तुम कभी भी मुझको न भूला देना |

भगवान.........

तुम देव, में पुजारी, तुम इष्ट, में उपासक,

यह बात सच है तो सच करके दिखा देना|

भगवान.........

आचार्य अजय मोहन लाल

Kaag Shakun Vichhar

Posted on May 28, 2013 at 3:15 PM Comments comments (211)

काग - शकुन विचार

महाभारत में एक स्थान पर उल्लेख मिलता है कि जिस समय कौरवों की सेना चली उसी समय उस पर कौए मंड्लाकार रुप में

मंडराने लगे, मानो वे कौरव वंश के क्षय की पूर्व- सूचना दे रहे हो|

वाल्मीकि रामायण के सुन्दर कांड में भी इसी प्रकार का एक प्रसंग है|उसमे रावण के सिर पर एक साथ कई कौए मंडराने लगते है मानो वे उसके विनाश की सूचना दे रहें हो|

ऊपर दिये दो उदाहरणों से यह स्पष्ट हो जाता हे कि कौओं के माध्यम से भावी घटनाओ की जानकारी प्राप्त करना प्राचीन मान्यता रही है|मत्स्य पुराण के अनुसार यदि कौआ अन्न का दाना ले कर उडे तो इसका मतलब अकाल पड़ना है|ऐसे कौए को देखने वाले पर भी निकट समय में कोई न कोई संकट अवश्य ही आता है | पराशर मुनि के अनुसार जिस व्यक्ति के सामने आकर कोई कौआ मांस का टुकड़ा गिरावे तो उसे शीघ्र ही धन की प्राप्ति होती है|इसी प्रकार गुड या पका हुआ चावल गिरावे तो उसे रुके हुए, फंसे हुए धन की प्राप्ति होती है|किसी कीड़े को गिरावे तो उसके शत्रुओं का शमन होता है| मिट्‍टी का ढेला गिरावे तो उस आदमी को भूमि का लाभ होता है | यदि कौआ किसी के सामने कागज का टुकडा ही गिरा देवे तो उसे विद्या का लाभ होता है|

वराहमिहिर के मतानुसार यदि कोई कौआ किसी व्यक्ति के समक्ष जोर-जोर से शब्द करे तो निश्चय ही वह् किसी गंभीर बीमारी या मृत्यु की सूचना देता है| एक, तीन अथवा पाँच कौओं का मिलना यात्रा में विघ्न-बाधा का सूचक है|

यदि किसी ऐसे कौए पर जो शांत भाव से पूर्व दिशा की और देख् रहा हो, किसी व्यक्ति की नजर अचानक पड जाय तो उसे आने वाले समय में अच्छा धन लाभ होता है | मान-सम्मान में वृद्धि होती है|रात में कौए का स्वर सुनना अशुभ माना गाया है| यदि किसी के कान में ऐसा स्वर सुनाई तो उसे तत्काल ईश्वर स्मरण या स्तुति मंत्र बोलना चाहिए| इससे अशुभता का दोष समाप्त हो जाता है|

ऐसे कौए को जो अपनी चोंच में पकड़ कर कोई हड्डी, सूखी टहनी, रस्स अथवा कांटों को ले जां रहा हो, कोई व्यक्ति देखे तो आगामी समय में उस पर भारी संकट आ सकता है| कम से कम 30 दिन तक सावधानी बरतनी चाहिए|

किसी हड्डी को खाते हुए जब कोई कौआ बोले तब उसे देखने वाले के स्वास्थ्य में गड़बड़ी होती है| द्वार पर बैठकर कौए का बोलना अतिथि आगमन की सूचना देता है,यदि किसी मकान पर दो कौए बैठे हों तथा वहाँ एक और तीसरा कौआ आकर बैठ जाए तो उस मकान में रेहने वाले के परिवार में वृद्धि होती है, इसमें बिल्कुल संदेह नहीं है| कपडे का टुकडा दबाकर चोंच में लाने वाला कौआ घर में चोरी होगी कि सूचना देता है|

जिस घर के आँगन में अथवा छत पर उड़ता हुआ कौआ गिर पडे, उस घर के भाग्य में असीमित वृद्धि होती है| उस परिवार पर आए तमाम संकटो का हरण हो जाता है |उसकी मान-प्रतिष्ठा और धन धान्य में वृद्धि होती है| जिस आँगन में कौआ मरा हुआ चूहा गिरा देवे वहॉ हर प्रकार कि कलह पैदा होगी| किसी हरे वृक्ष पर बैठे कौए को देखना, कौए के घोंसले को देखना, अपनी दाहिनी ओर किसी बुर्ज पर बैठे कौए को देखना शुभ माना जाता है|जब आप अपने बच्चे को या नाती- पोते को कुछ खिला रहे हों ओर कौआ दिखाई पडे तो शुभ है| सिर पर कौए का बैठना मृत्युसूचक माना जाता है|

Acharya Ajay Mohan Lal

AKSHAYA TITIYE

Posted on May 12, 2013 at 5:20 PM Comments comments (5)

अक्षय तृतीय

सुख-सोभाग्य का प्रतीक

यह पर्व हर साल बैशाख शुक्ल पक्ष तृतीय तिथि को मनाया जाता हे| इस दिन नर - नारायण, परशुराम, ह्‌गीव का अवतार हुआ था एवं त्रेतायुग का आरंभ भी इसी दिन हुआ था| इसके अलावा Brahmaji के बेटे, अक्षय कुमार का जन्म भी इसी तिथि को हुआ था|बद्रीनारायण के कापाट भी इसी दिन खुलते हैं| अक्षय तृतीया के दिन बिना लग्न मुहूर्त के भी विवाह कर देने से दाम्पत्य जीवन सफल हो जाता हे|

अक्षय तृतीय के दिन ही महाभारत की लड़ाई भी खत्म हो गई थीं और द्वापर युग भी समाप्त हुआ था| इस तिथि की महत्व को बताते हुए भगवान श्री कृष्ण ने युधिषिटर को बताया था कि आज के दिन जो भी रचनात्मक या संसारिक कार्य करोगे उसका पुण्य प्रताप अक्षय रहेगा|नया काम, नया घर,नया कारोबार आदि शुरू करने से उसमें बरकत और ख्याति ख़ुद अक्षय तृतीय के प्रताप से मिलती हैं |

अक्षय तृतीया के दिन पंखा, चावल, नमक, घी, चीनी, सब्जी, वस्त्र आदि का दान बहुत महत्वपूर्ण माना जाता हैं|

अक्षय तृतीया को मां गोरी का पर्व भी माना जाता हैं|इस दिन गोरी (पार्वती)की पूजा कर स्थायी वैवाहिक सुख की कामना की जाती हैं|जिन व्याक्तियो के विवाह में देरी हो तथा विवाह के उपरांत दाम्पत्य जीवन में तनाव के कारण पूर्ण वैवाहिक सुख नहीं मिल रहा हैं,तो उनके लिए यह प्रयोग लाभकारी हैं|इस दिन शिव मंदिर में जाकर, गोरी शंकर रुद्राक्ष धारण करनेसे मनोकामना शीघ्र पूर्ण होती हैं|

अक्षय तृतीय के दिन संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपति घर में पारद के लड्‌डू गोपालजी की स्थापना करके नित्य संतान गोपाल स्तोत्र का पाठ करें, तो शीघ्र ही उन्हें संतान सुख प्राप्त होगा |

तंत्र शास्त्र में इस दिन पारद लक्ष्मी की साधना को शीघ्र फलदायी माना गया हैं| निर्धन से निर्धन व्यक्ति भी यदि पारद लक्ष्मी का पूर्ण श्रद्धा एवं विश्वास के साथ यथाविधि साधना करता हैं तो वह् शीघ्र ही धनवान एवं ऐश्वर्यवान बनता हैं| गौमती चक्र को भी लक्ष्मी दायक माना गया हैं|अक्षय तृतीय के दिन यदि ग्यारह गोमती चक्र एवं ग्यारह कोडिया किसी लाल कपडे में बाँध कर अपनी दुकान, आफिस के मुख्य द्वार की चौखट पर लगा दी जाएँ, तो व्यापार एवं व्यवसाय में वृद्धि होगी| यह सरल तथा आश्चर्यजनक परिणाम देने वाला प्रयोग हैं| इसे पूर्ण विश्वास के साथ करना चाहिए|

आर्चाय अजय मोहन लाल


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